लेखनी कहानी -17-Jan-2023
शीर्षक-मॉं की अंतिम लोरी
सुजय और सुजाता मेड शी गाव मे टीचर थे। काफी साल से उन्हे बच्चा नही होता है। 12साल बाद सुजाता पेट से होती है। फिर उन्हे लडका होता है। उसका नाम गणेश रखते है। सुजाता बेटे से बडा प्यार करती है। फिर एक दिन बेटे को लोरी गाकर सुलाती है और पाठशाला मे जाने को निकलती है तो पिछे से ट्रक की लोरी से रास्ते पर उसका accident होता है।
ambulance आते आते बहोत खून बह जाता है और डॉक्टर भी सुजाता को बचा नही पाते है। उससे उसका देहांत हो जाता है। उसका पार्थिव शरीर घर लाया जाता है। सुजाता के मा के पास गणेश या ने सुजाता का बेटा होता है। सुशीला नाम की महिला केयर टेकर होती है वो रो कर बोलती है कि दीदी ने लोरी गाकर सुलाया बेटे को अब उनकी आवाज कभी इस घर मे नही आयेगी । यह लोरी उनकी आखिरी थी।
स्कूल से आने का टाइम हो जाता है और गणेश रोने लगता है फिर सुजाता की माँ गणेश को चमच से दुध पिलाती है वो शांत हो जाता है और वो कुछ समझ नही पाता है कि उसकी कभी नही आयेगी। यह देखकर सब के आंखे भर आती है।
प्रतियोगिता हेतू मेरी स्वरचित एवं अप्रकाशित तथा मौलिक कहानी
आशा करती हू कि आप लोगो को मेरी कहानी अच्छी लगेगी।
- अभिलाषा देशपांडे
Gunjan Kamal
20-Jan-2023 04:19 PM
बहुत ही सुन्दर
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Babita patel
20-Jan-2023 03:28 PM
beautiful story
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सीताराम साहू 'निर्मल'
17-Jan-2023 11:25 PM
बहुत खूब
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